| कविराज लालू कवियों की वैसे तो कोई Girlfriend नहीं होती, मगर कहानी शुरु हो जाये तो, कभी End होती । वाजपेयी जी कास एक बार चर्चा तो कर दिये होते, बहन मायावती जी, क्या उनकी पलंग नही होती ॥
यह सुन, लालूजी की भी कवि बनने की तमन्ना जाग उठी, हेमामालिनी-हेमामालिनी बड़बड़ा रहे थे कि राबड़ी भाग उठी । फिर क्या, सोचे राबड़ी कहीं किसी और से मिलने जा रही है, वो बेलन संग लौटी तो, उनको लगा हेमामालिनी आ रही है ॥
पिटने के बाद कहने लगे, तुम्हें किसी से प्यार क्यूँ नही हो जाता, मोदी को सोनिया पसंद नहीं, सो मैं तुम्हें ही उनके पास दे आता । मोदीजी क्या कम थे, बोले- 'जयललिता हमको रोज भोज पर बुलाती', 'मेरा तो मुसकुराना बाकी है, वरना तमिलनाडु दहेज मे मिल जाती '॥
निराश हो सोचे, गर कहीं राबड़ी-औ-वाजपेयी का चक्कर चल जायेगा, एक का घुटना टूटा ही रहता है, दूसरे को मालिश-ड्यूटी मिल जायेगा । ये दो बेरोजगार जब साथ होंगे, तो पक्का मस्त-मस्त गुल खिलायेंगे, और फिर कुवारों की लिस्ट मे, केवल अपने कलाम जी रह जायेंगे ॥
और, उधर धमेंद्र जी ज्यादा हल्ला किये तो, उनको पशु चारा खिलायेंगे, फिर भी नही माने तो, सन्यासन उमा संग उनके सात फेरे लगवायेंगे । 'कमल' के इन दोनो फूलों से, बिहार में ढ़ेरों रोज 'लालटेन' जलवायेंगे, और 'गरीब रथ' मे Free Ticket पे, रेलवे Honeymoon मनवायेंगे ॥
फिर लालुजी, हेमामालिनी संग अपना ब्याह रचायेंगे, और लालु नही, ललुवा नही, कविराज लालु कहलायेंगे ॥॥
तू तू असीम है, तू अप्रतिम है, तू ही सत्य, तू ही त्याग, तुझसे ही सम्मान है, तू मेरा सर्वस्व है, तुझसे ही मेरा जहान है ।
तू मेरे स्वप्न में है, तू ही मेरी समृद्धि में, तू मेरे प्रयत्न में है, तू ही मेरी सिद्धि में, मेरी बंदिश मे तू, मेरे हर लब्ज, हर कशिश मे तू ।
मेरा हर कजरा तेरे लिये, मेरा हर गजरा तेरे लिये, मेरा लम्हा गुजरा तेरे लिये, मेरा लम्हा ठहरा तेरे लिये, मेरे जीने की आदत तू, मेरी इबारत तू, मेरी इबादत तू ।
ना कोई उद्देश्य मेरा, ना ही मेरी परिभाषा है, तू ही मेरी जागृति, तू ही मेरी जिजीविषा है, मेरी प्रकृति में तू, मेरी प्रवृत्ति में तू, स्नेह की सलज्जा वृत्ति में तू ।
तू ही मेरा उपनाम है, तू ही मेरा सर्वनाम है, मेरी हर सिफत तू, हर उल्फत मे तेरा नाम है, हर साज, हर नगमों मे तुम ही तुम हो, मेरे हर हसीन महकमों में तुम ही तुम हो ।
भोर की परछाई में तू, दुपहरी की तन्हाई में तू, शाम की शहनाई मे तू, निशा की गहराई में तू, तू अथाह आकाश है, मेरे लिये तू ही प्रकाश है ।
मेरी कविता है तू, प्रेरणा तुझसे, हर अलंकार तेरे लिये, मेरे लेखनी की सरिता तू, मन का रस, श्रृंगार तेरे लिये, मेरी अर्चना तू, मेरी वंदना तू, हर स्तुति तू, हर अनुभुति तू ।
तुम हो तो हँसी है, खुशी है, तुम हो तो अपनत्व है, जीवन में ताजगी, उन्मादगी और मीठा ममत्व है, मेरी तपन में तू, मेरी लगन में तू, चहकते जहन में तू, महकते गगन में तू ।
मेरी उम्मीद, मेरे विश्वास, सब पर तेरा वर्चस्व है, मेरे कर्म मे तू, मेरे मर्म मे तू, तू ही मेरा सर्वस्व है। मेरे सच मे तू, मेरे झूठ में तू, तू ही मेरा सर्वस्व है, तू असीम है, तू अप्रतिम है, तू ही मेरा सर्वस्व है ।।
तीन शब्द
सुबह की हर पहली किरण से रात की कालिमा तक, भावनाओं की हर परतों को लांघती वो तीन शब्द ॥ इक एहसास जगाती है कोई इसे बेमानी तो कोई रोजमर्रा की रीत करार देती है मगर भाव तो भाव है औ इन तीन शब्दों में बसी हर गुँज मन की कोरों से सजी होती है, कोई माने या ना माने हर जवाब में वही तीन शब्द कुछ तो कह देती है हो ना हो, पल के लिये सही मान लेता हूँ जुबाँ से निकली हर आवाज झूठी नहीं होती है कुछ तो सच होगा इस आस मे अगर बीत जाये जिंदगी तो क्यूँ ना कहूँ हर सुबह, हर मुलाकात मे तीन शब्द ॥
आराम करो करना ही है तो कुछ आराम करो क्या रखा है जग में जो नाम करो
सुट्टे से सुबह तो दारु से शाम करो मौज में कसर नहीं मस्तियाँ तमाम करो बनना हो मोटा तो हर बारात हराम करो सोचना ना कभी, हर गली बदनाम करो पाँव भारी करके सही, खुशियों का इंतजाम करो
करना ही है तो कुछ आराम करो क्या रखा है जग में जो नाम करो
कलियों को कलाम तो, बालाओं को सलाम करो रोते को ढ़ेर सारी गाली तो, हसते को प्रणाम करो भूलकर सबकुछ, अपनी अर्जी नीलाम करो ज्यादा हो परेशानी तो संग्राम करो जो भी करना हो, सड़ेआम करो
करना ही है तो कुछ आराम करो क्या रखा है जग में जो नाम करो
कुछ तो सोच लूँ कुछ तो सोच लूँ कहीँ सोच कर कुछ कर लूँ हो सकता है सोच प्रवृत्ति बदल दे और प्रवृत्ति जिंदगी बदल दे मगर अनमने निष्प्राण सोच को रंग कैसे दे कोई ये तो भी सोचने को है कुछ तो सोच लूँ ॥
वक्त बीतता चला ठहरे पलों में माना कुच सोच भी लिया सोच कर बैठ जाना ही तो नियति नहीं सोच को हराकर पौधे का रूप देना आसान तो नहीं इसे आंसा कैसे बनाया जाये ये तो भी सोचने को है कुछ तो सोच लूँ ॥
मान लो चल दिये किसी डगर पर मगर हर डगर सीधी तो नहीं कोई तो रोके कोई तो टोके बीच डगर पर संभाले और ले चले मंजिलें जिंदगी की वो कौन होगा, कैसा होगा ये तो भी सोचने को है कुछ तो सोच लूँ ॥
| | तुम तुम रोज कहती हो, तुम अच्छी नहीं हो, मासूम हो, पगली हो, मगर बच्ची नहीं हो, लड़ती हो, झगड़ती हो, पर सच्ची नहीं हो, क्यूँ कहती हो कि, तुम अच्छी नहीं हो
दिल से शैतान हो, पर झूठी नहीं हो, खुद से परेशान हो, पर रूठी नहीं हो तुम सच्ची हो, सचमुच की बच्ची हो, मै कहता हूँ ना, तुम बहुत अच्छी हो,
गर लगता तुझे, ये मेरी गलतफहमी है, तो तुझे क्या सोचना, तु क्यूँ सहमी है
जो कहना है मुझे, बस तुम कह लेने दो, जो धुंध है मन में, उसमें ही रह लेने दो, खशियों मे तेरी, हँसी अपनी सी लेने दो, मुझे मेरी गलतफहमियों मे जी लेने दो
इक पल सही, हर दिन आगोश मे सो लेने दो, दिल जो करे रोने को, साथ अपने रो लेने दो, तेरी चंचलता की खशबू में, मुझको खो लेने दो , तेरी बातों की जादू में, खुद को भिगो लेने दो
तुम, मुझे मेरी गलतफहमियों मे जी लेने दो, दो चार घूंट संग, मुस्कुराहटों के पी लेने दो
तेरी ताजगी पे चाहे तो, रोशनी को भी निखर लेने दो, अपनी सादगी से आज तू, चाँदनी को भी सँवर लेने दो, गर झुक जाये फलक तो, सितारों को भी बह लेने दो, तु इतनी प्यारी है, मुझे ये चंदा को भी कह लेने दो
तुम सच्ची हो, तुम पगली हो, तुम बच्ची हो, मानो ना मानो, मैं कहता हूँ, तुम अच्छी हो गर लगता तुझे, ये मेरी गलतफहमी है, तो तुझे क्या सोचना, तु क्यूँ सहमी है
तुम मुझे मेरी गलतफहमियों मे जी लेने दो, दो चार घूंट संग, मुस्कुराहटों के पी लेने दो जो कहना है मुझे, बस तुम कह लेने दो, मुझे मेरी गलतफहमियों मे रह लेने दो
Oxford की ऐसी सुंदरता बोलो हँसकर कहने को तीन term रोने को आठ हफ्ता बोलो किसकी मजाल जो कह दे, पढ़ना यहाँ सस्ता बोलो निकलता हूँ Bodleian को, पकड़ता हूँ Turf का रास्ता बोलो जागता हूँ रातभर, मगर ओम Facebookay नमः हूँ रटता बोलो Oxford की ऐसी सुंदरता बोलो
ना कोई Attendance फिर भी हूँ हर Lecture सुनता बोलो पता नहीं क्या खाते Professor, कोई बीमार नहीं पड़ता बोलो शर्त है सारे College का नाम कोई नहीं कह सकता बोलो इतनी भी memory नहीं, फिर भी शान से अकड़ता बोलो Oxford की ऐसी सुंदरता बोलो
लोग Exams से डरते हैं, मैं तो Essay लिखने से मरता बोलो मैं ही धोबी, मैं ही Cook कौन है इतनी मिहनत करता बोलो छात्र यहाँ सिर्फ Gown पहन भी है, Punting करता बोलो बगल के कमरे में बैठे पड़ोसी से Skype पे Chatting करता बोलो Oxford की ऐसी सुंदरता बोलो
बिन गाय सड़क, बिन बंदर चौराहा, है सब सूना लगता बोलो इक Tyre Puncture को पाँच Pound का चूना लगता बोलो ना कोई रैली, ना हंगामा, ना अपने लालू सा नेता बोलो, चार लोगों के धरने को आठ पुलिस है पहरा देता बोलो Oxford की ऐसी सुंदरता बोलो
इक ही आदमी इक ही जगह Big Issue ले पड़ा सड़ता बोलो हर जगह इतने नखरे नियम, किसको नहीं अखड़ता बोलो इतना बड़ा दुमंजिला बस, पता नही सब Tube क्यूं कहता बोलो हम तो दिये जलाते थे दीवाली पे, यहाँ पर Bop क्यूं रहता बोलो Oxford की ऐसी सुंदरता बोलो
जहाँ तहाँ छप्पन Events तो, पग पग पे इतिहास सँवरता बोलो थोड़ी धूप क्या खिली, इक रुमाल से है तन ढ़कता बोलो George Street को भूल भी जाओ तो Sansbury की महत्ता बोलो बिन Bod Card औ बिन Supervisor के यहाँ कोइ क्या रह सकता बोलो Oxford की ऐसी सुंदरता बोलो Nirale Rang Ektak, Nirantar, Sansparsh Anubhut Magan Baitha hoon ! Aur hain--- Bojhil Komal Nayano me Nikharte Sapno ke Nirale Rang !!
Tabhi--- Neeras, Karkas Goonj koi Bewajah Hiloren lagati hai ! Tootta hai Sannata Jhini Jhallahat se Footti hai Kan ki Sookhi Parten Aur fir--- Bikhar Jata hai Rang Kho Jata hai Dhudhlahat se!!!!
Sambhalna Apne ko, Itna Aansa to Nahi! Kash-Itna to hota Doobta Apni Taal me Betaal Aur ye Hiloren-- Chuskiyon ki Tarah Aati Jaati Rah jaati Aur Hamesha hota-
Wahi--- Bojhil Komal Nayano me Nikharte Sapno ke Nirale Rang.. Rang.. Nikharte Sapno ke Nirale Rang Rang!!!!!! Nirale Rang !!!!!!!!
He!!! GUIDE Devta
Jab se ‘Thesis’ ki baat chali hai, Frustration ki ulti ghat chali hai, Mahina beet gaya hai, Dimag reet gaya hai, ‘Case Study’ ki chhoro--- ‘Objective’ bhi nahi hua hai; Thesis jyon ka tyon para hai, “Vidyarthee” chaurahe pe khara hai !!!
He ! GUIDE Devta Tu kya janm se sara hai, Mere hi pechhe para hai!!! Aata roj milne ghabraya sa, Chakit-dalit bharmaya sa Tu ‘illustrate’ nahi ‘illuse’ karta hai, Tu ‘clear’ nahi ‘confuse’ karta hai Tu jo karta Bakwas hai, Kya meri peera ka ehsas hai !!
He ! GUIDE Devta Ya to tum kuch karo- Ya mujhe kuch karne do, ‘Degree’ ki aas rahne do, Mujhe ‘thesis’ pass karne do Muhe ‘thesis’ pass karne do!!!!!!!!
Kavi Hoon
Kavi hoon, Kavita karta hoon, Ghar baithe samandar aur sarita bharta hoon, Amawas ki raat na sahi to, ujale par machalta hoon, Whisky ho mahnga to, tharree pe atakta hoon, Pet me refrigerator to, dil me heater rakhta hoon Naam ho lalita to, ‘Lolita’ padhta hoon Kavi hoon kavita karta hoon,………….
Bahe hoo, aahen ho, rahen ho nigahe hoon, Aag ho dhua ho, pathar ho kuan ho, Punya ho paap ho, yaa gadhe ka baap ho, Jaat ho paat ho, samasya ka nijat ho, Lachar hoo chaukidaar hoo, Murabba ka achar ho, Chhotta ho khota hoo, garib ka lota ho, Thali ho gaali ho, parosan ho sali hoo Har kuch pe marta hoon, har kuch pe likhta hoon,
Kavi hoon kavita karta hoon… Kavi hoon kavita karta hoon././/
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